Dr.Sunil Kumar

Homoeopathic physician
Naturopathy,Acupressure,yoga,Herbal & Reiki Consultant For Chronic & Incurable disease

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Shahad Ke Gun Anek...

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 23, 2013 at 10:35 PM Comments comments (2)

-शहद को मसूड़ों पर मलने से पायरिया नहीं होता।


-छोटे बच्चों को दूध पिलाने से पहले शहद चटा दें। फिर दूध पिलाएं ये रोग निरोधक क्षमता बढ़ाता है।


- बेसन, मलाई में शहद मिलाकर त्वचा पर लगाएं। थोड़ी देर बाद धो लें, चेहरा चमक उठेगा ।


- प्रतिदिन 25 ग्राम शहद दूध के साथ जरूर लें । इससे शरीर को ताकत मिलती है।


- त्वचा सम्बन्धी रोग हो या कहीं जल-कट गया हो तो शहद लगाएं। जादू सा असर दिखाई देगा।


- रात को सोने से पहले दूध के साथ शहद लेने पर बहुत अच्छी नींद आती है।


- दूध में शक्कर की जगह शहद लेने से गैस नहीं बनती और पेट के कीड़े भी निकल जाते हैं।


- जुकाम होने पर शहद की भाप लें व उसी पानी से कुल्ला करें........

Bhuke na rahe...

Posted by Dr.Sunil Kumar on December 10, 2012 at 10:05 AM Comments comments (0)

भूख लगना एक प्राकृतिक क्रिया है।हैं। भूख लगने पर भी भोजन न करने से शरीर में शिथिलता व कमजोरी का अनुभव होने लगता है क्योंकि हमारे शरीर में जठाराग्रि आहार को पचाने काम करती है। आहार न मिलने पर वही अग्रि वात पित्त व कफ को पचाती है। शरीर की धातुओं का क्षय होने लगता है।  भूख लगने पर भोजन न करने पर या भूख मारने से भोजन के प्रति अरूचि, थकावट,आंखों की ज्योति कम होना,  कमजोरी आदि समस्याएं होती हैं। भूख मरने पर खाया हुआ खाना हजम नहीं होता और जितना कुछ हजम होता है वह भी बहुत देर से होता है। इसलिए भूख मारना ठीक नहीं होता।

10 Important Tips......

Posted by Dr.Sunil Kumar on October 30, 2012 at 11:25 AM Comments comments (1)

कई बार एसीडिटी या कब्ज के कारण कुछ लोगों को भूख नहीं लगने की समस्या होती है। अगर आपके साथ भी ये समस्या है तो नीचे लिखे 10 सिम्पल टिप्स अपनाएं......


1. भोजन के एक घंटा पहले पंचसकार चूर्ण को एक चम्मच गरम पानी के साथ लेने से भूख खुलकर लगती है।


2. रात में सोते समय आँवला 3 भाग, हरड़ 2 भाग तथा बहेड़ा 1 भाग-को बारीक चूर्ण करके एक चम्मच गुनगुने पानी के लेने से सुबह दस्त साफ आता है एवं भूख खुलकर लगती है।


3. भोजन में पतले एवं हलके व्यंजनों का प्रयोग करने से खाया हुआ जल्दी पच जाता है, जिससे जल्दी ही भूख लग जाती है।


4. खाना खाने के बाद अजवायन का चूर्ण थोड़े से गुड़ के साथ खाकर गुनगुना पानी पीने से खाया हुआ पचेगा, भूख लगेगी और खाने में रुचि पैदा होगी।


5. भोजन के बाद हिंग्वष्टक चूर्ण एक चम्मच खाने से पाचन-क्रिया ठीक होगी।


6. हरे धनिए में हरी मिर्च, टमाटर, अदरक, हरा पुदीना, जीरा, हींग, नमक, काला नमक डालकर सिलबट्टे पर पीसकर बनाई चटनी खाने से भोजन की इच्छा फि र से उत्पन्न होती है।


7. भोजन करने के बाद थोड़ा सा अनारदाना या उसके बीज के चूर्ण में काला नमक एवं थोड़ी सी मिश्री पीसकर मिलाने के बाद पानी के साथ एक चम्मच खाने से भूख बढ़ती है।


8. एक गिलास छाछ में काला नमक, सादा नमक, पिसा जीरा मिलाकर पीने से पाचन-क्रिया तेज होकर आरोचकता दूर होती है।


9. भोजन के बाद 5-10 मिनिट घूमना पाचन में सहायक होता है।


10. भोजन करने के बाद वज्रासन में कुछ देर बैठना भी बेहद लाभदायक होता है।

Treatment...............

Posted by Dr.Sunil Kumar on September 18, 2012 at 12:55 PM Comments comments (0)

Treatment:-Stress, Depression, Obesity, B.P.(High/Low), Joints Pain, Sciatica, Paralysis, Nerve Disorder, Psychosis, Mania, Epilepsy, Hysteria, Skin Disease, Asthma, Gastric , Ulcer, Diabetes, Kidney Disease, Liver Disorder ,Cyst, Leucorrhea, Syphilis, Cancer, Tumor, Brain Tumor etc.

Training :-Acupressure, Ashtang Yoga, Power Yoga, Kundalini Yoga, Reiki,Chakras Cleansing & Activation

COMPUTERISED HOMOEO CLINIC, DIVINE YOGA,ACUPRESSURE,REIKI & NATUROPATHY CENTER

Dr. Sunil Kumar

Homoeopath,Yoga, Naturopathy, Acupressure, Reiki & Herbal Consultant

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Website: http://healthconsultant.in/

Budhi Bdhane Ki Vidhi............

Posted by Dr.Sunil Kumar on September 12, 2012 at 10:55 AM Comments comments (2)

बुद्धि बढाने की वैज्ञानिक विधि......

अनेक विचारों और जानकारियों का मस्तिष्क में भरना, बुद्धि बढ़ाने का एक आवश्यक उपाय है । छोटे बालक को यदि गंदी, बासी या छूत के रोग वाली मिठाई दे दी जाय, तो वह खा लेगा, चाहे उससे पीछे हानि ही क्यों न उठानी पड़े, किंतु बड़ा आदमी जिसे भोजन की विशुद्धता के संबंध में ज्ञान है, हानिकारक मिठाई को न खावेगा । गँवारों को उनके हित की बात बताई जाय तो भी उन्हें उल्टी लगती है । कारण यह है कि जिसे जानकारी नहीं है, वह उस संबंध में हित-अहित को न समझ सकेगा, फिर ठीक निर्णय तो कर ही क्या सकता है ? इसलिये जीवन की महत्त्वपूर्ण समस्याओं और आवश्यकताओं के संबंध में हमें अधिक से अधिक ज्ञान का संचय करना चाहिए । उत्तम पुस्तक पढ़ना, योग्य व्यक्तियों से पूछना और ज्ञानपूर्ण वातावरण में रहना अधिक जानकारी प्राप्त करने का मार्ग है । इन्हें अपनाने से बहुत लाभ हो सकता है ।


About Mango.........

Posted by Dr.Sunil Kumar on August 23, 2012 at 3:15 PM Comments comments (0)

आमों के 10 स्वास्थ्य लाभ ...

आम इतना अच्छा है कि लोग भूल जाते हैं वे भी स्वस्थ हैं स्वाद! डिस्कवर कैसे "फलों का राजा" क्या आप मदद कर सकते हैं.

स्वास्थ्य लाभ:...

1. कैंसर से बचाता है:

अनुसंधान दिखाया है आम के फल में एंटीऑक्सीडेंट यौगिकों बृहदान्त्र, स्तन, लेकिमिया, और प्रोस्टेट कैंसर के खिलाफ की रक्षा के लिए पाया गया है. इन यौगिकों quercetin, isoquercitrin, astragalin, fisetin, फ्ऱांस देश एसिड और methylgallat के, के रूप में अच्छी तरह से प्रचुर मात्रा में एंजाइमों शामिल हैं.

2. कोलेस्ट्रॉल कम करती है:

पेक्टिन, फाइबर और विटामिन सी का उच्च स्तर के लिए सीरम कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम मदद करने के लिए, विशेष रूप से कम घनत्व लेपोप्रोटीन (बुरी चीजें;)

3. त्वचा को साफ करता है:

दोनों आंतरिक और बाह्य त्वचा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. आमों स्पष्ट भरा हुआ pores और pimples को खत्म करने.

4. आँख स्वास्थ्य:

कटा हुआ आम के एक कप में विटामिन ए, जो अच्छी दृष्टि को बढ़ावा देता है और रात का अंधापन और शुष्क आँखें रोकता की जरूरत दैनिक मूल्य के 25 प्रतिशत की आपूर्ति.

5. पूरे शरीर alkalizes है:

tartaric एसिड, सेब का तेज़ाब, साइट्रिक एसिड का पता लगाने के फलों में पाया बनाए रखने में मदद करने के लिए शरीर का क्षार आरक्षित.

6. मधुमेह में मदद करता है:

आम के पत्तों के रक्त में इंसुलिन का स्तर मानक के अनुसार मदद करते हैं. पारंपरिक घर उपाय उबलते पानी में पत्ते, रात के माध्यम से भिगोने और फिर उपभोक्ता सुबह फ़िल्टर काढ़े शामिल है. आम के फल भी एक अपेक्षाकृत कम glycemic सूचकांक (41-60) है तो मध्यम मात्रा में कील अपने शर्करा के स्तर को नहीं होगा.

7. बेहतर सेक्स:

आम हालांकि सेक्स ड्राइव और विटामिन ई के बीच लोकप्रिय कनेक्शन मूल चूहा अध्ययन पर एक गलत सामान्यीकरण द्वारा बनाया गया था विटामिन ई का एक बड़ा स्रोत हैं, और अधिक अनुसंधान संतुलित उचित मात्रा में (के रूप में पूरे भोजन से;) दिखाया गया है इस क्षेत्र में मदद.

8. पाचन में सुधार है:

पपीता ही फल है कि नीचे प्रोटीन को तोड़ने के लिए एंजाइमों शामिल नहीं हैं. वहाँ आम है, जो इस स्वस्थ गुणवत्ता सहित कई फल, कर रहे हैं. आम में फाइबर भी पाचन और उन्मूलन में मदद करता है.

9. हीट स्ट्रोक के लिए उपाय

हरी आम और पानी और एक स्वीटनर के साथ मिश्रण से फल juicing के नीचे शरीर शांत और नुकसान tothe शरीर को रोकने में मदद करता है. आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, कारण लोगों को अक्सर मूत्रवर्धक मिलता है और थक जब भूमध्य जलवायु पर जाकर मजबूत "सूर्य की ऊर्जा आपके शरीर जल रहा है विशेष रूप से मांसपेशियों, क्योंकि है. गुर्दे तो इस प्रक्रिया से विषाक्त पदार्थों के साथ अतिभारित बन गया है.

10. प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा

विटामिन सी और विटामिन ए आम में अधिक carotenoids के 25 विभिन्न प्रकार के उदार मात्रा में अपने प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिए

Important Matter...........

Posted by Dr.Sunil Kumar on August 16, 2012 at 8:20 AM Comments comments (0)

1-morning walk में दौडना नहीं बल्कि चलना चाहिए अन्यथा इससे आगे चल कर घुटने की समस्या हो जाती है |

2--सुबह के नाश्ते/भोजन के बाद जूस या फलों का रस लें ,

--दिन के भोजन के बाद छांछ एवं,

-- रात के भोजन के बाद गर्म दूध लें

3-शाम को भोजन जल्दी करने का प्रयास करें ,पाचन की दृष्टिकोण से भी ऐसा ज़रूरी है और भोजन में सूर्य का प्रकाश(Vitamin D) होना अत्यंत ज़रूरी है |इसलिए कोशिश करें की सूर्यास्त के पहले ही भोजन कर लें (हालकि आज की जीवन शैली में सूर्यास्त के पहले भोजन करना नामुमकिन सा है फिर भी जल्द से जल्द भोजन करने का प्रयास करना चाहिए )

4-सबसे ज़रूरी बात :-सुबह सिर्फ दूध पीकर बच्चों को स्कूल न जाने दें ,इससे आगे चलकर उन्हें Permanent Ulcer ,Acidity इत्यादि बीमारी हो सकती हैं |

About Vitamin..........

Posted by Dr.Sunil Kumar on July 28, 2012 at 12:10 PM Comments comments (0)

एक नई स्टडी ने मेडिकल जगत समेत आम लोगों में हलचल मचा दी है। इसके मुताबिक अधिक मात्रा में विटामिन सप्लीमेंट्स सेहत के लिए अच्छे नहीं हैं। इन्हें खाने से पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की आशंका बढ़ जाती है।

स्टडी में शामिल विशेषज्ञों के मुताबिक विटामिन सप्लीमेंट्स लेने के बजाय उनके प्राकृतिक स्रोत यानी फल-सब्जियों का सेवन करना ज्यादा सही है। अगर सप्लीमेंट्स लेने की जरूरत पड़े भी, तो विशेषज्ञ से सलाह-मशविरा के बाद बताई गई मात्रा में ही उनका सेवन करें।

विटामिन ए से फ्रैक्चर

दावा:विटामिन ए से दिल की बीमारियों की आशंका बढ़ जाती है। इसकी ज्यादा मात्रा से हिप फ्रैक्चर का खतरा भी बढ़ता है, खासकर महिलाओं में।

आधार: विटामिन ए के ज्यादा सेवन से शरीर द्वारा कैल्शियम को जज्ब करने की क्षमता प्रभावित होती है। इसका असर हड्डियों की सेहत पर पड़ता है।

जरूरी क्यों:विटामिन ए दृष्टि समेत शरीर के प्रतिरोधी तंत्र के लिए बहुत जरूरी है। ये ऊतकों को स्वस्थ रखता है। इसकी कमी से दृष्टिदोष बढ़ता है। बेहतर होगा बीटा केरोटिन युक्त मल्टीविटामिन खरीदें, जो एक ऑर्गेनिक कंपाउंड होता है।

प्राकृतिक स्रोत:गाजर, पालक, लाल मिर्च, टमाटर, नारंगी, आड़ू, अंडे और दुग्ध उत्पाद।

विटामिन बी 6 से अनिद्रा

दावा:विटामिन बी 6 का सेवन करने से न सिर्फ आधी रात को नींद खुल जाती है, बल्कि यह बेतरतीब सपनों का भी कारण है।

आधार: विटामिन बी 6 ट्रिप्टोफैन को सेरोटोनिन हार्मोन में बदलने में मदद करता है। यह हार्मोन नींद के चक्र को व्यवस्थित रखता है। इसके स्राव में गड़बड़ी से नींद की मात्रा में कमी आती है।

जरूरी क्यों: इसकी कमी से त्वचा, नाड़ी, म्यूकस मैंब्रेन और सकरुलेटरी सिस्टम प्रभावित होते हैं। ये ऊतकों के निर्माण के लिए भी जरूरी है।

प्राकृतिक स्रोत:पनीर, अंडे, मेवे, साबुत अनाज, बींस और फलीदार सब्जियां।

विटामिन सी से कैंसर

दावा:विटामिन सी के ज्यादा सेवन से डीएनए क्षतिग्रस्त होते हैं। इससे कैंसर और आर्थराइटिस की आशंका बढ़ती है।

आधार: 500 मिलीग्राम या इससे ज्यादा होने पर विटामिन सी प्रो-ऑक्सीडेंट बन जाता है। इससे कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होती हैं।

जरूरी क्यों: शरीर में इसकी कमी से त्वचा से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं। यही नहीं, हार्ट अटैक समेत रक्त वाहिनियों से जुड़ी अन्य परेशानियां भी सामने आती हैं। थकान ज्यादा महसूस होती है और बीमारी जल्दी-जल्दी घेरती है।

प्राकृतिक स्रोत:अमरूद, किवी, पपीता, नींबू, नारंगी और स्ट्रॉबेरी।

विटामिन डी से किडनी पर असर

दावा: विटामिन डी की अधिक मात्रा से किडनी और उसके ऊतक क्षतिग्रस्त होते हैं। इससे फ्रैक्चर होने की आशंका बढ़ती है।

आधार: विटामिन डी की अधिकता से खून और पेशाब में कैल्शियम का स्तर बढ़ता है। इससे किडनी में स्टोन बनते हैं।

जरूरी क्यों: इसकी कमी स्ट्रोक की आशंका बढ़ाती है। शरीर सही तरीके से काम नहीं करता, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापे की समस्या आ घेरती है। यही नहीं, इसकी कमी जोड़ों में दर्द देने समेत हड्डियों को कमजोर (ऑस्टियोपोरोसिस रोग) बनाती है।

विटामिन के से लिवर पर असर

दावा:विटामिन के कुछ एंटीऑक्सीडेंट्स के काम में रुकावट डालता है। इसके सेवन से कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। ज्यादा मात्रा एनीमिया, पीलिया और खून पतला होने की आशंका बढ़ाती है।

आधार:खून में इसकी ज्यादा मात्रा से लाल रक्त कोशिकाएं टूटने लगती हैं। इसकी परिणति लिवर की समस्या के रूप में सामने आती है।

जरूरी क्यों:यह हड्डियों को मजबूती देने समेत खून को गाढ़ा बनाए रखता है। इसकी कमी से ऑस्टियोपोरोसिस और ब्लीडिंग होने लगती है।

About Mungfali............

Posted by Dr.Sunil Kumar on July 9, 2012 at 5:20 AM Comments comments (4)

मूंगफली एक पौष्टिक आहार है इसीलिए इसे गरीबों की बादाम भी कहा जाता है। एक अंडे की कीमत में जितनी मूंगफली आती है, उसमें इतना प्रोटीन होता है जितना दूध और अंडे में भी नहीं होता है। यह आयरन, नियासिन, फोलेट, कैल्शियम और जिंक का अच्छा स्रोत हैं। आधी मुट्ठी मूंगफली के दानों में 426 कैलोरीज 5 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 17 ग्राम प्रोटीन और 35 ग्राम वसा होती है। इसमें विटामिन ई, के और बी6 भी भरपूर मात्रा में पाए जाते है। इसलिए अगर आप ऊपर लिखे पोषण के साथ ही नीचे लिखे फायदे भी पाना चाहते हैं तो रोजाना लाल छिलके वाले कम से कम 20 मूंगफली के दाने खाएं....

To Gain Weight............

Posted by Dr.Sunil Kumar on June 6, 2012 at 2:55 PM Comments comments (0)

Go Yogic gharelu mote hone ka upchar ( To gain weight )

6 almond+1 glass milk+ 4 bananas+ 1spoon honey+ 1 mango + half spoon aswagandha powder.

Mix 6 almonds and bananas with milk. Then put 1 spoon honey in that milk .Drink daily morning empty stomach.And in the night eat mango with dinner and take half spoon aswagandha powder before sleeping for 90 days . At least you will gain between 6 kgs to 7 kgs in 90 days .

 

Pani Pine Ka Sahi Tarika...........

Posted by Dr.Sunil Kumar on May 29, 2012 at 3:35 AM Comments comments (1)

पानी पिने के तौर-तरीका और शारीरिक फायदा...

पानी पीने की सही विधि -

1--"पानी हमेशा घूँट घूँट करके पीना चाहिए क्योंकि इससे लार का निर्माण होता है |

2--हमारे पेट में भोजन को पकाने के लिए अम्ल होते हैं और मुह में जो लार होती है वो क्षार होता है

अम्ल+क्षार =न्यूट्रल (सामान्य) पानी हो जाता है |

3--इसलिए जितना घूँट घूँट करके पानी पियेंगे क्षार बनेगा और पेट में जाकर भोजन का पाचन होगा और पेट हमारा पानी की तरह रहेगा मतलब ढीला (स्वस्थ)रहेगा |

4--लार में medicinal property होती हैं ,जो की internal healingके भी काम आती हैं |

5--पानी हमेशा शरीर के temperature के अनुसार पीना चाहिए यानी की न ज्यादा न ही chilled |क्योंकि ज्यादा ठंडा पानी पीने से पेट को अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है और अंगों को कार्यशीलता (दिमाग ,ह्रदय etc.)धीरे- धीरे कम होने लगती है|

6--दिमाग का रक्त Gravity के कारण सबसे पहले कम होने लगता है और आगे चलकर Brain hamerege इत्यादि रोगों के होने का डर रहता है |

Mental Disease.....

Posted by Dr.Sunil Kumar on March 27, 2012 at 4:10 AM Comments comments (0)

मानसिक रोग (मन का विकार )

अधिकतर लोग पहले मन से रोगी होते हैं ! फिर धीरे-धीरे शरीर रोगी होने लगता है !

शरीर में अमृत के स्थान पर विष बनने लगता है ! जिसको आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के अनुसार हार्मोन कहते हैं !जब यह हार्मोन संतुलित रहता है तो अमृत के समान कार्य करता है ! जब यह असंतुलित हो जाता है तो विष के समान विकार उत्पन्न करता है !

यह हार्मोन मन (माइंड ) से अदृश्य रूप में जुड़ कर अपना कार्य करता रहता है ! जैसे-जैसे मन स्थिर होता है हार्मोन भी स्थिर रूप से उत्पन होते रहता है ! जैसे मन विकार ग्रस्त होता है, उसी प्रकार विकार ग्रस्त हार्मोन भी उत्पन्न होने लगता है !

यह हार्मोन खाना पीना अर्थात आहार विहार से सम्बंधित होता है !

चिकित्सा शास्त्र के अनुसार वैज्ञानिको ने सात प्रमुख हार्मोन उत्सर्जन करने वाले अंग को खोज लिया है जो शरीर को नियंत्रित करता है !

यह सातो ग्लैंड वैदिक काल से खोज किया हुआ है जो सात चक्र के नाम से जानते हैं !

आधुनिक काल के वैज्ञानिक लाख कोशिस के बाद हार्मोन पर नियंत्रण करने में असफल हैं ! आधुनिक चिकित्सा में कोई उपचार है ही नहीं बल्कि इसे दवा से रोगों को दवा दिया जाता है ! बाद में सर्जरी के द्वारा उपचार किया जाता है ! सर्जरी प्राचीन भारत का देन है ! आधुनिक चिकित्सा में, जिसका सर्जरी संभव नहीं है उस बीमारी का कोई इलाज नहीं है ! उस श्रेणी में हार्मोन उत्पन्न करने वाले अंग है !

वैदिक काल में योगी, ऋषि के द्वारा किया हुआ खोज से पूर्ण रूप से हार्मोन उत्पन्न करने वाले अंग पर नियंत्रण करना बिलकुल असान है !

स्त्री एवं पुरुष में सात प्रमुख चक्र तथा हार्मोन उत्पन करने वाले ग्लैंड :

कर्मश : सिर से पैर कि ओर -

१. सहसरार चक्र ,२. आज्ञां चक्र, ३. विशुद्धि चक्र, ४. अनाहत (हृदय) चक्र, ५. मणिपुर (सौर्य) चक्र, ६. स्वादिसठान चक्र, एवं ७. मूलाधार चक्र ,

1. Pineal gland 2. Pituitary gland 3. Thyroid gland 4. Thymus 5. Adrenal gland 6. Pancreas 7. Ovary (female), Testes (male)

Ayurvedic Dohe.............

Posted by Dr.Sunil Kumar on March 5, 2012 at 3:25 AM Comments comments (0)

आयुर्वेदिक दोहे

1.जहाँ कहीं भी आपको,काँटा कोइ लग जाय। दूधी पीस लगाइये, काँटा बाहर आय।।

2.मिश्री कत्था तनिक सा,चूसें मुँह में डाल। मुँह में छाले हों अगर,दूर होंय तत्काल।।

3.पौदीना औ इलायची, लीजै दो-दो ग्राम। खायें उसे उबाल कर, उल्टी से आराम।।

4.छिलका लेंय इलायची,दो या तीन गिराम। सिर दर्द मुँह सूजना, लगा होय आराम।।

5.अण्डी पत्ता वृंत पर, चुना तनिक मिलाय। बार-बार तिल पर घिसे,तिल बाहर आ

जाय।।

6.गाजर का रस पीजिये, आवश्कतानुसार। सभी जगह उपलब्ध यह,दूर करे अतिसार।।

7.खट्टा दामिड़ रस, दही,गाजर शाक पकाय। दूर करेगा अर्श को,जो भी इसको खाय।।

8.रस अनार की कली का,नाक बूँद दो डाल। खून बहे जो नाक से, बंद होय तत्काल।।

9.भून मुनक्का शुद्ध घी,सैंधा नमक मिलाय। चक्कर आना बंद हों,जो भी इसको खाय।।

10.मूली की शाखों का रस,ले निकाल सौ ग्राम। तीन बार दिन में पियें, पथरी से

आराम।।

11.दो चम्मच रस प्याज की,मिश्री सँग पी जाय। पथरी केवल बीस दिन,में गल बाहर जाय।।

12.आधा कप अंगूर रस, केसर जरा मिलाय। पथरी से आराम हो, रोगी प्रतिदिन खाय।।

13.सदा करेला रस पिये,सुबहा हो औ शाम। दो चम्मच की मात्रा, पथरी से आराम।।

14.एक डेढ़ अनुपात कप, पालक रस चौलाइ। चीनी सँग लें बीस दिन,पथरी दे न दिखाइ।।

15.खीरे का रस लीजिये,कुछ दिन तीस ग्राम। लगातार सेवन करें, पथरी से आराम।।

16.बैगन भुर्ता बीज बिन,पन्द्रह दिन गर खाय। गल-गल करके आपकी,पथरी बाहर आय।।

17.लेकर कुलथी दाल को,पतली मगर बनाय। इसको नियमित खाय तो,पथरी बाहर आय।।

18.दामिड़(अनार;) छिलका सुखाकर,पीसे चूर बनाय। सुबह-शाम जल डाल कम, पी मुँह बदबू जाय।।

19. चूना घी और शहद को, ले सम भाग मिलाय। बिच्छू को विष दूर हो, इसको यदि लगाय।।

20. गरम नीर को कीजिये, उसमें शहद मिलाय। तीन बार दिन लीजिये, तो जुकाम मिट जाय।।

21. अदरक रस मधु(शहद;) भाग सम, करें अगर उपयोग। दूर आपसे होयगा, कफ औ खाँसी रोग।।

22. ताजे तुलसी-पत्र का, पीजे रस दस ग्राम। पेट दर्द से पायँगे, कुछ पल का

आराम।।

23.बहुत सहज उपचार है, यदि आग जल जाय। मींगी पीस कपास की, फौरन जले लगाय।।

24.रुई जलाकर भस्म कर, वहाँ करें भुरकाव। जल्दी ही आराम हो, होय जहाँ पर घाव।।

25.नीम-पत्र के चूर्ण मैं, अजवायन इक ग्राम। गुण संग पीजै पेट के, कीड़ों से

आराम।।

26.दो-दो चम्मच शहद औ, रस ले नीम का पात। रोग पीलिया दूर हो, उठे पिये जो प्रात।।

27.मिश्री के संग पीजिये, रस ये पत्ते नीम। पेंचिश के ये रोग में, काम न कोई

हकीम।।

28.हरड बहेडा आँवला चौथी नीम गिलोय, पंचम जीरा डालकर सुमिरन काया होय॥

29.सावन में गुड खावै, सो मौहर बराबर पावै॥

Routine of Healthy Man / Woman.

Posted by Dr.Sunil Kumar on February 11, 2012 at 3:45 PM Comments comments (0)

स्वस्थ व्यक्ति की दिनचर्या के अंतर्गत हमने कल आहार की चर्चा की थी |आज हम अन्य बिंदुओं पर प्रकाश डालेंगे ;-

निद्रा --भगवान ने प्रकृति को कुछ ऐसे नियमों में बाँधा है की मनुष्येतर प्राणी पशु ,पक्षी सायंकाल होने पर अपने अपने ठिकानों पर चले जाते हैं |ये अभागा मनुष्य ही उल्लू की तरह रात भर जागता है और ब्रह्म्बेला का आनंद लिए बिना पड़ा रहता है |

स्वस्थ व्यक्ति को 5-6 घंटे की नींद पर्याप्त है |बच्चों और वृद्ध लोगों को कम से कम 8 घंटे सोना चाहिए |

1-अगर रात में नींद नहीं आ रही हो ,धरती माँ के पैर छुएं और सीधे लेटकर 100 से 1 तक उलटी गिनती मन ही मन में ओम के साथ करें धीरे -धीरे नींद आ जायेगी |

2-ब्रह्मचर्य--अपनी इन्द्रियों एवं मन को विषयों से हटाकर ईश्वर एवं परोपकार में लगाने का नाम ब्रह्मचर्य है |केवल उपस्थ इन्द्रिय का संयम -मात्र ही ब्रह्मचर्य नहीं है |

3--स्नान --रोगी को छोड़ कर सामान्य व्यक्ति को ठन्डे पानी से स्नान करना चाहिए |गर्म पानी से स्नान करने पर मन्दाग्नि एवं दृष्टि दुर्बलता इत्यादि रोग हो जाते हैं |असमय में ही बाल सफ़ेद होने एवं गिरने लगते हैं |

स्नान के बाद शरीर को खादी के तौलिए से रगड़ केपोंछना चाहिए |यदि कब्ज है पेट को रगड़ कर पोंछना चाहिए |

4-व्यायाम --बिना व्यायाम के शरीर अस्वस्थ तथा ओज -कांतिहीन हो जाता है |जबकि नियमित रूप से वायाम करने से दुर्बल ,रोगी एवं कुरूप व्यक्ति भी बलवान स्वस्थ एवं सुन्दर हो जाता है |

ह्रदय रोग ,मधुमेह मोटापा ,वातरोग ,बवासीर गैस ,रक्तचाप ,मानसिक तनाव आदि का भी मुख्य कारण शारीरिक श्रम का अभाव है |इनमे आसान -प्राणायाम सर्वोत्तम है |इससे शरीर के साथ मन में एकाग्रता एवं शान्ति का विकास होता है |

About Teeth Cleaning............

Posted by Dr.Sunil Kumar on February 9, 2012 at 10:25 AM Comments comments (0)

खूबसूरती के मापदंड में चेहरे में नयन और नक्श के बाद दांतों की बनावट और दिखावट का महत्वपूर्ण स्थान होता है। साफ सफेद और चमकते दांत किसी भी चेहरे की खूबसूरती में चार चांद लगा सकते हैं।

- आजकल के बच्चों के दांत सफेदद-सुन्दर नहीं होते क्योंकि टूथपेस्ट में डले हुए फ्लोराईड से दांत और हमारे शरीर की हड्डियां गलने, खराब होने लगती हैं। इस पर अनेक शोध हो चुके हैं। अत: पेस्ट के स्थान पर किसी आयुर्वेदिक या प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से बने हुए मंन्जन का प्रयोग करना चाहिये।


- कभी-कभी अवसर मिलने पर नीम, बबूल, बिल्व आदि पेड़ों से प्राप्त दांतुन भी करते रहना चाहिये।


- मल-मूत्र त्याग के समय दांत दबाकर बैठें और बाद में कुल्ला कर लें। इससे भी दांत मजबूत बनते हैं। असल में मल-मूत्र त्याग के समय हमारे दांतों की जडों में कुछ तेजाबी पदार्थ एकत्रित होकर उनकी जडों को कमजोर बना देते हैं। कुल्ला करने से ये तेजाबी तत्व निकल जाते हैं। हमारे पूर्वज तभी तो मल-मूत्र त्याग के बाद सदा कुल्ला किया करते थे।

About Urine & Stool Discharge..............

Posted by Dr.Sunil Kumar on February 2, 2012 at 1:50 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे --

1-मूत्र का वेग रोकने से रक्त के सारे विकार शरीर में आयेंगे शरीर में दबाव बढ़ता है |मॉल का वेग रोकने से गैस की समस्या ,पेट में दर्द ,सर में दर्द ,चक्कर आना जैसे रोगों का जन्म होता है |

2-पानी हमेशा कम surface tention वाले पात्र का ही पीना चाहिए शरीर को फायदा होता है इससे |पहले के ज़माने में लोटे से पानी पीने का प्रचलन था जो की वैज्ञानिक था ,कुंवे का पानी, तालाब का पानी ,अधिक स्वस्थ्प्रद होता है क्योंकि इनका surface tention आकारगत कम होता है |

http://www.youtube.com/watch?v=AavZsmWh4hU&feature=related

3-पानी का सबसे बड़ा गुण है शरीर की सफाई करना |बड़ी आँत एवं छोटी आँत के बीच में membrane होती है ,कचड़ा वहीँ जाकर फंसता है|जब surface tention कम वाला (लोटे इत्यादि का )पानी पियेंगे तो वहाँ की सफाई जल्दी और ज्यादा होगी |कम surface tention वाला पानी पीने से छोटी आँत और बड़ी आँत का S.T.कम हो जाता है और वो खुल जाती हैं और शरीर का कचड़ा बाहर निकल जाता है जो मल के रूप में होता है |

4-EXAMPLE--

दूध का SURFACE TENTION सबसे कम होता है |जब हम दूध से त्वचा को साफ़ करते हैं तो काला रंग निकलता है जो शरीर की गंदगी होती है |दूध त्वचा का SUR. TEN. कम कर देता है और त्वचा खुल जाती है जिससे शरीर की गंदगी बाहर निकल जाती है |

http://www.youtube.com/watch?v=-jh9IEzH5SA

5-high surface tention से तनाव बढ़ता है और चीज़ सिकुड़ती है |

low surface tention से तनाव कम होता है और चीज़ खुलती है |

इसलिए अगर गिलास की जगह कम S. T. वाले पपानी पिए तो अधिक स्वास्थ्प्रद होगा |

Rajiv dixit ayurveda episode 8 part 2...

Posted by Dr.Sunil Kumar on February 2, 2012 at 1:50 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे --

1-भूख के वेग को कभी नहीं रोकना चाहिए ,इससे acidity ,intestinal cancer होने का खतरा होता है

2-जब भी हम अतिरिक्त भोजन करते हैं इसके बाद उपवास कर सकते हैं |उपवास कभी निर्जला नहीं करना चाहिए ,पानी ज़रूर पीते रहना चाहिए |

*उपवास के दौरान कई प्रकार से पानी को पी सकते हैं --

--लौंग का पानी

--मूंग का पानी

--पानी में घी डालकर

--पानी उबालकर उसमे चूना मिलाकर पियें |

http://www.youtube.com/watch?v=f7w5TjsC3fQ

3-उपवास के दौरान पानी ज़रूर पीते रहना चाहिए क्योंकि हमारे शरीर में पेट में अम्ल बन्ने की प्रक्रिया हमेशा चलती रहती है |ये अम्ल HCL(hydrochloric acid) होता है जो खाना पचाने में सहायक है |

पानी पीते रहने से HCL dilute होकर urine के through निकलता रहता है ,अन्यथा अंतडियां कमज़ोर हो जाती हैं |peptic ulcer इत्यादि खतरनाक रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है |

4-मांसाहारियों को लंबा उपवास करना चाहिए क्योंकि मांसाहार से पाचन क्रिया के रसों की ग्रंथियों की गति कम हो जाती है |

5-उबासी (जंभाई )को कभी नहीं रोकना चाहिए क्योंकि जब blood में oxygen की मात्र कम हो जाती है तो oxygen की मात्र को सम करने के लिए मुह खुलता है और हम स्वांस के माध्यम से इसे करते हैं

Rajiv dixit ayurveda episode 8 part 2

Rajiv dixit ayurveda episode 8 part 1

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 31, 2012 at 2:05 AM Comments comments (11)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे --

प्रत्येक चेतन प्राणी में कुछ स्वाभाविक इच्छाएँ पायी जाती हैं जो समय समय पर आवेगों के रूप में अपने आप प्रकट होती रहती हैं |इनकी समय पर पूर्ती करना बहुत आवश्यक है |समय पर पूर्ती न करने से अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो सकते हैं |प्रमुख आवेग माने गए हैं --

*आजकल social etiquetes के चलते हम कुछ वेगों को रोक देते हैं जैसे -छीकना ,डकार ,जंभाई ,रोना ,जोर से हंसना इत्यादि जो की स्वस्थ की दृष्टि से अनुचित है |

http://www.youtube.com/watch?v=l8E4nDWaLZw

1-मूत्र त्याग

2-मल त्याग

3-अधोवायु का त्याग

4-वामन या उलटी

5-छींकना

6-डकार लेना

7-जंभाई लेना

8-भूख

9-प्यास

10-रोना या आंसूं बहना

11-अधिक परिमाण से तेज स्वांस

12-मैथुन

13-निद्रा

14-हंसी

*व्यक्ति को हमेशा सम भाव में रहना चाहिए न ज्यादा भोगी न ज्यादा त्यागी |

*कभी भी ज़बरजस्ती न हँसे और स्वाभाविक हंसी को कभी न रोकें |क्यों की कृत्रिम हंसी mechanical

होगी उसमे न कोई रस होगा न कोई भाव और शरीर को कोई लाभ नहीं होगा |

*प्यास का वेग कभी भी न रोकें ,और प्यास लगने पर कभी भी जल्दी जल्दी पानी न पियें, बैठ कर धीरे धीरे पानी पियें ,अन्यथा भविष्य में Hernia ,Apendisites ,Hydrocil ,Prostate जैसे रोगों के होने संभावना रहती है |

to be continued..........Rajiv dixit ayurveda episode 8 part 1

Rajiv dixit ayurveda episode 7 part 5

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 31, 2012 at 2:05 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे --

1-पित्त प्रकृति के लोगों को अधिक नहीं सोना चाहिए ,६ घंटे की नींद पर्याप्त है

2-पित्त प्रकृति के लोगों को दांत toothpaste से नहीं करना चाहिए बल्कि कसाय या कड़वे पदार्थ जैसे बबूल -नीम ,मदार ,अर्जुन की दातून से दांत साफ़ करने चाहिए |सर्दियों में अमरुद या जामुन की दातून अच्छी रहती है |

3-नीम की दातून लगातार यदि लगातार करते हों तो 3 महीने के करने के बाद कुछ दिन के लिए छोड़ दें ,इसके बाद फिर शुरू कर दें |

4-कुछ घरेलू दंतमंजन बनाने की विधि --

*त्रिफला चूर्ण +सेंधा नमक ,मिला कर दांत साफ़ करें

*तेल +नमक +हल्दी ,मिलकर दांत साफ़ करें ,इससे दांतों का पीलापन भी जाता है और दांत मज़बूत भी होते हैं |

*गाय के गोबर की राख+सेंध नमक+कपूर

http://www.youtube.com/watch?v=FE5ruRHLYIo&feature=related

5-पित्त रोगी व्यायाम पहले करें इसके बाद मालिश करें ,पसीना आने पर मालिश बंद कर दें |

6-वात रोगी मालिश पहले करें फिर व्यायाम करें |वात रोगियों को दौडना चाहिए ,तेज व्यायाम नहीं करना चाहिए |उनके लिए सूर्यनमस्कार सर्वोत्तम है |

7-60वर्ष के ऊपर के लोगों को व्यायाम नहीं करना चाहिए |मालिश ज़रूरी है -कान ,तलवे की ,सिर की |इस अवस्था में पसीना आने तक मालिश नहीं करना है 10-15 min की मालिश पर्याप्त है |

8-महिलाओं को forward bending ज़रूर करना चाहिए और हमेशा कमर से झुकें |Rajiv dixit ayurveda episode 7 part 5

About Papaya (papita)............

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 28, 2012 at 10:45 AM Comments comments (0)

पपीता को पेट के लिए वरदान माना गया है। कहते हैं पेट के रोगों को दूर करने के लिए पपीते का सेवन करना लाभकारी होता है। पपीते के सेवन से पाचनतंत्र ठीक होता है। पपीते का रस अरूचि, अनिद्रा (नींद का न आना;), सिर दर्द, कब्ज व आंवदस्त आदि रोगों को ठीक करता है। पपीते का रस सेवन करने से खट्टी डकारें बंद हो जाती है। पपीता पेट रोग, हृदय रोग, आंतों की कमजोरी आदि को दूर करता है। पके या कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाना पेट के लिए लाभकारी होता है।


पपीते के पत्तों के उपयोग से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है और हृदय की धड़कन नियमित होती है। पपीता में विटामिन ए, बी, डी, प्रोटिन, कैल्सियम, लौह तत्व आदि सभी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।पपीता वीर्य को बढ़ाता है, पागलपन को दूर करता है एवं वात दोषों को नष्ट करता है। इसके सेवन से जख्म भरता है और दस्त व पेशाब की रुकावट दूर होती है। कच्चे पपीते का दूध त्वचा रोग के लिए बहुत लाभ करता है। पका पपीता पाचन शक्ति को बढ़ाता है, भूख को बढ़ाता, पेशाब अधिक लाता है, मूत्राशय के रोगों को नष्ट करता है, पथरी को लगाता है और मोटापे को दूर करता है। पपीता कफ के साथ आने वाले खून को रोकता है एवं खूनी बवासीर को ठीक करता है।


इसमें पेप्सिन नामक तत्व पाया जाता हैं। जो भोजन को पचाने में मदद करता है। पपीता का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है। चूंकि सारे रोगों का कारण पेट के सही ना होने के कारण होता है इसलिए पपीते का सेवन रोज करना चाहिए। पपीता खाने से वजन कम हो जाता है। पपीते का प्रयोग लोग फेस पैक में करते हैं। पपीता त्वचा को ठंडक पहुंचाता है। पपीते के कारण आंखो के नीचे के काले घेरे दूर होते हैं।कच्चे पपीते के गूदे को शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाने से कील-मुंहांसो का अंत होता है।


कच्चे पपीते की सब्जी खाने से याददाश्त बढ़ती है। जबकि पपीते का जूस पीने से मनुष्य में यौन शक्ति की वृद्धि हो जाती है। पपीता ऐसा फल है जो ना तो काफी महंगा होता है और ना ही मुश्किल से मिलता है इसलिए पपीते का सेवन हर व्यक्ति को रोज करना चाहिए। सिर्फ एक महीने नियमित रूप से आप पपीता खाइये फर्क आप खुद ही महसूस करेगें और सबसे कहेगें कि पपीता खाओ और काम पर जाओ। समय से पूर्व चेहरे पर झुर्रियां आना बुढ़ापे की निशानी है। अच्छे पके हुए पपीते के गूदे को उबटन की तरह चेहरे पर लगायें। आधा घंटा लगा रहने दें। जब वह सूख जाये तो गुनगुने पानी से चेहरा धो लें तथा मूंगफली के तेल से हल्के हाथ से चेहरे पर मालिश करें। ऐसा कम से कम एक माह तक नियमित करें। हृदय रोगियों के लिए भी पपीता काफी लाभदायक होता है।


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