Dr.Sunil Kumar

Homoeopathic physician
Naturopathy,Acupressure,yoga,Herbal & Reiki Consultant For Chronic & Incurable disease

Blog


view:  full / summary

Rajiv dixit ayurveda episode 7 part 3

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 27, 2012 at 1:10 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे --

1-सुबह सोकर उठने के बाद बच्चों की मालिश ज़रूर करें |मालिश सबसे अधिक ह्रदय से सिर तक करें क्योंकि कफ का प्रभाव सर्वाधिक इसी जगह रहता है |मालिश तब तक करें जब तक बगल में या माथे में पसीना न आ जाये |

2-बच्चों के कान की भी मालिश करें |

3-बच्चों की आँख में देशी गाय का घी लगाएं इससे कफ का शमन होता है |

4-बच्चों के भोजन में -गुड ,दूध,घी ,मख्खन ,तेल,मूंगफली ,तिल जैसी भरी चीज़ें ज़रूर होनी चाहिए क्योंकि ये कफ नाशक हैं |

5-बच्चों को मैदे से बनी चीज़ें न दें इससे कफ बढ़ता है इसकी जगह आटे का प्रयोग करें

http://www.youtube.com/watch?v=E1qSYa4yQnI&feature=related

6-बच्चों को साबुन न लगाएं ,इसकी जगह चने का आटा+चन्दन पावडर ,मुल्तानी मिटटी का प्रयोग करें ,इससे नहाने से भी कफ शांत होता है और त्वचा स्निग्ध्ह रहती है

http://www.youtube.com/watch?v=7hM_BUPgNy8&feature=related

7-बच्चों को सोते समय प्रेरणादायक और लंबी कहानियां सुनाएँ इससे उनकी कल्पनाशीलता बढती है और व्यक्तित्व में निखर आता है |

8-बच्चों के मन में प्रश्न बहुत होते हैं ,हमेशा उनका सही जवाब दें अन्यथा उनके मन में आपकी गलत अवधारणा बनेगी |

9-बच्चों की कल्पना शीलता बहुत होती है उसलिये उन्हें T V इत्यादि कम से कम देखने दें ,गलत कार्यक्रम देखने से उनके मन मष्तिष्क में गलत प्रभाव पड़ता है |

Rajiv dixit ayurveda ........

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 27, 2012 at 1:05 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे ---

1- हमारे शरीर में वात-पित्त -कफ की अवस्था सम में रहती है तो हमारा शरीर तीनों स्तर ,चित्त -मन -शरीर पर स्वस्थ रहता है |

शरीर की अवस्था एवं उम्र के अनुसार हमें अपनी दिनचर्या निर्धारित करना चाहिए |

http://www.youtube.com/watch?v=vZqxTodOF6M&feature=related

2-जन्म से -13-14 वर्ष तक शरीर में कफ का प्रभाव अधिक रहता है |

14 वर्ष -60 वर्ष तक पित्त का प्रभाव अधिक रहता है |

60वर्ष से ऊपर वायु का प्रभाव रहता है |

3-कफ का स्वभाव भारी(गुरुत्व )होता है ,इसलिए इसके प्रभाव में नींद अधिक आती है ,और इसी कारण B.P.भीबढ़ा रहता है |सोने से B.P.कम होता है या सामान्य होता है |

http://www.youtube.com/watch?v=LiFpkq7iwR0&feature=related%E0%A4%95

4-छोटे बच्चों में कफ बहुत ज्यादा होता है इसलिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा सोना चाहिए |कम नींद से उनके अंदर चिडचिडापन बढ़ेगा |कफ का प्रकोप अधिक होने से aggressiveness बढती है |

कफ के नियंत्रण से प्रेम एवं सद्भावना उत्पन्न होती है |

5-एक शोध के अनुसार America ,Europe जैसे देशों में बच्चे अधिक हिंसक होते हैं ,आपराधिक प्रव्रत्ति के होते है क्योंकि ये देश ठन्डे देश हैं और यहाँ बच्चों में कफ का प्रकोप अधिक होता है |

6- 4 वर्ष तक के बच्चों को कम से कम 15-16 घंटे सोना चाहिए ,इससे उनका विकास अधिक होता है |http://www.youtube.com/watch?v=vZqxTodOF6M&feature=related

( Diabetes )

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 17, 2012 at 1:05 AM Comments comments (0)

डायाबिटीस....

भारत में करीब 5 Crore लोग यह रोग से पीड़ित हे |

रोज सुबह उठकर 5 मिनिट भ्रस्त्रिका,30 मिनिट कपालभाती ,30 मिनिट अनुलोब विलोम का प्राणायाम करे और उसके साथ नीचे बताये इलाज में से कोई भी एक करे....

लेकिन प्राणायाम सभी इलाज में करना आवश्यक हे |

इलाज :-

# 100 Gms. मेथी का दाना + 100 Gms. तेज पत्ता ( जिसे हम गरम मसाले में इस्तेमाल करते हे ) + 150 Gms जामुन के बीज का पावडर +250 Gms बेलपत्र के पत्ते का पावडर 

ये सब को पत्थर में पीस कर पावडर बना लो |  

अब ये पावडर को एक बार सुबह का नाश्ता और एक बार शाम के खाने के एक घंटे पहले 1-1 चमच गरम पानी के साथ लो |

याद् रखे सुबह और शाम दोनों समय यह दवा ले और खाने के एक घंटे पहले खाये और यह दवा के इस्तेमाल के दौरान शक्कर का इस्तेमाल ना करे शक्कर की जगह गुड खा सकते हे |


यह दवा खाने के 2-3 महीने में ही सुगर लेवल से कम हो जायेगा और फिर जब सुगर लेवल से कम हो जाये तो दवा को बंद करदे लेकिन प्राणायाम को चालू रखे


# एक चमच मेथी के दाने को रात भर गुनगुने पानी में भिगो कर रखे सुबह उठकर ये पानी पी जाओ और सभी मेथीदाने को चबा चबा कर खा जाओ |


# मेथी के पावडर की फंकी कभी मत लो...हमारे यहाँ अक्सर लोग मेथी के दाने की फंकी लेते हे लेकिन यह उतनी असरकारक नहीं हे जितना गुनगुने पानी में भिगाई हुई मेथी को चाबचाबा कर खाना...तो मेथी को रात भर गुनगुने पानी में भिगो कर रखे सुबह उठकर ये पानी पी जाओ और सभी मेथीदाने को चबा चबा कर खा जाओ |

Rajiv dixit ayurveda episode 6 part 3

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 10:00 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे ---

गोमूत्र का महत्व--

1-T.B. ,सोरायसिस ,त्वचा के सभी रोगों को जड़ से ठीक करता है |

2-शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है |

3-कैसर जैसे रोग को ठेक करने में सहायक है ,प्रयोगों द्वारा ये सिद्ध हो चूका है की करक्यूमिन नामक तत्व की कमी से ही CANCER होता है |करक्यूमिन तत्व की कमी से शरीर की CELLS (कोशिकाएं ) uncontrolld हो जाती हैं और cancer का रूप धारण करती हैं |

http://www.youtube.com/watch?v=WA1vVSZg4Ek&feature=related

4-शोंधों से ये ज्ञात हुआ है की गोमूत्र में करक्यूमिन नामक तत्व digestive form में पाया जाता है और पीते ही इसका असर होना शुरू हो जाता है |

5-पित्त -कफ की बीमारियाँ ,जोड़ों का दर्द इत्यादि बीमारियों में अत्यंत लाभकारी है गोमूत्र |हजारों वर्ष पुरानी है गोमूत्र चिकित्सा हमारे देश में |

6- गोमूत्र लेने का तरीका --सुबह खाली पेट लेना चाहिए

अधिक बीमार व्यक्तियों को दिन में दो बार खाली पेट लगभग 100 ml लेना है

सामान्य व्यक्तियों को दिन में एक बार खली पेट लगभग 50 ml. लेना है |

7-जिस प्रकार एक माँ अपने बच्चे के लिए हर ज़रूरी चीज़ उपलब्ध कराती है उसी प्रकार गौमाता भी हमें अनेक प्रकार की चीज़ें उपलब्ध कराती है जैसे ---दूध ,गौमूत्र ,गोबर इत्यादि |

गौमाता का संरक्षण करें ,संस्कृति की रक्षा करें |

Rajiv dixit ayurveda episode 6 part 2

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:55 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रंखला में गतांक से आगे ---

1-स्त्रियों में, calcium को शरीर में digest कराने वाले harmone तभी तक सक्रिय रहता है जब तक मासिक धर्म (periods) होते रहते हैं |इसलिए स्त्रियों को 45 वर्ष तक अपना खान-पान बहुत ही पौष्टिक और calcium युक्त होना चाहिए |

2-चूना calcium का सबसे अच्छा श्रोत है ,पहले के ज़माने में चूने वाला पान खाने के बाद लेने का प्रचलन था उसका वैज्ञानिक आधार था |इससे शरीर में calcium की कमी पूरी होती थी |पान में कत्थे का प्रयोग नहीं करना चाहिए |

http://www.youtube.com/watch?v=WeQNx2cYGaU&feature=related

3-दालचीनी --वायु के सभी रोग खतम होते हैं |इसको साबुत की बजाय पाउडर करके खाना चाहिए |

*दालचीनी को गुड के साथ खाए बाद में गर्म पानी पियें |

*दालचीनी को शहद के साथ खूब घिसें फिर चाटकर खाएं इससे वात रोगों में खासकर asthma (दमा) में बहुत लाभ होता है |

Rajiv dixit ayurveda episode 6 part 1

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:50 AM Comments comments (0)

योग और आयुर्वेद की श्रृंखला में --

1-diabetes में fruit juice की बजाय फल खाएं |प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं में जो शर्करा होती है वो fructose होती है और सुपाच्य होती है |

2-मेथी - वातनाशक एवं कफनाशक है |पित्त के रोगियों को मेथी नहीं लेना चाहिए क्योंकि ये पित्त को बढाती है |

मेथी का प्रयोग कैसे करें ? रात में एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच मेथी दाने भीगा दें |सुबह भीगी हुई मेथी को खूब चबा चबा कर खाएं |मेथी का गुण कटु (कड़वा )क्षारीय होता है इसलिए चबा चबा कर खाने से लार बनती है और वो पेट में जाकर acid को balance करती है |diabetes pateints के लिए ये प्रयोग रामबाण की तरह कार्य करता है |

http://www.youtube.com/watch?v=AtKYV8KcwR4&feature=related

3-अचार में अगर अजवाइन ,मेथी ,जीरा जैसे औषधीय मसालों का प्रयोग होता है तो वो औषधि का कार्य करता है |

4-calcium की उपस्थिति में ही शरीर के बाकी micronutrients काम करते हैं|

5-calcium हमें दूध ,दही ,मठ्ठा ,घी ,संतरा ,अंगूर ,द्राक्ष ,केला इत्यादि से प्रचुर मात्रा में मिलता है|

Rajiv dixit ayurveda episode 5 part 6

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:50 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे ---

1-सर्दी के मौसम में आंवला प्रचुर मात्रा में मिलता है ,यदि हम किसी कारनवश आंवला नहीं ले पा रहे हैं तो २-३ आंवला रोज सुबह खाएं |

2-आंवला को हम चटनी ,अचार ,मुरब्बा किसी भी रूप में खा सकते हैं |

3-हमारे शरीर में हमेशा क्षय (oxidation )की प्रक्रिया चलती रहती है |आंवला एक anti oxdental fruit है ,इससे क्षयिकरण की प्रक्रिया कम होती है |ये anti aging का काम करता है |त्वचा स्निग्ध रहती है हमेशा |

http://www.youtube.com/watch?v=L4Q7iEv6eh4&feature=related

4-त्रिफला यदि हम ले रहे हैं तो लगातार लगभग 3 महीने तक ले सकते हैं |इसके बाद 15-20 दिनों के लिए छोड़ दें फिर से शुरू कर दें |लगातार नहीं लेना है ,क्योंकि अधिकता से भी शरीर में विपरीत प्रभाव पड़ता है |

5-वज़न कम करने के लिए त्रिफला एक बड़ा चम्मच गुड के साथ लेना है और यदि पेट की समस्या के लिए ले रहे हैं तो एक छोटा चम्मचगर्म दूध या गर्म पानी के साथ लेना है |

Rajiv dixit ayurveda episode 5 part 5

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:45 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे :--

1-दोपहर के खाने के बाद अजवाइन और काला नमक खाने से पेट में गैस की समस्या से छुटकारा मिल जाता है |

2-सोंठ में अदरख से 100 गुना ज्यादा गुण होते हैं |

3-पान का पत्ता (गहरे रंग का )सोंठ ,गुलकंद ,सौंफ ,लौंग ,इलाइची के साथ खाने से कफ शांत होता है

4-आंवला :--यह एक ऐसा पदार्थ है जिसमे वात-पित्त-कफ तीनो को एक साथ शमन करने का गुण पाया जाता है |

आंवला +हरद +बहेड़ा =त्रिफला

5-त्रिफला का अनुपात होना चाहिए :- 1:2:3=1(हरद )+2(बहेड़ा )+3(आंवला )

http://www.youtube.com/watch?v=83z41zipGfI&feature=related

6-त्रिफला लेने का सही नियम -

*सुबह अगर हम त्रिफला लेते हैं तो उसको हम "पोषक " कहते हैं |क्योंकि सुबह त्रिफला लेने से त्रिफला शरीर को पोषण देता है जैसे शरीर में vitamine ,iron,calcium,micronutrients की कमी को पूरा करता है एक स्वस्थ व्यक्ति को सुबह त्रिफला खाना चाहिए |

*सुबह जो त्रिफला खाएं हमेशा गुड के साथ खाएं |

*रात में जब त्रिफला लेते हैं उसे "रेचक " कहते है क्योंकि रात में त्रिफला लेने से पेट की सफाई (कब्ज इत्यादि )का निवारण होता है |

*रात में त्रिफला हमेशा गर्म दूध के साथ लेना चाहिए |

Rajiv dixit ayurveda episode 5 part 4

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:40 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे :--

1-दूध में कभी भी गुड मिलकर नहीं खाना चाहिए |पहले या बाद में गुड खाएं |

2-दही में हमेशा गुड मिलकर खाना चाहिए |

3-अगर हम पूरे जाड़े भर खाने के बाद काला तिल खूब चबा चबा कर खाएं तो ३ महीने में ही 8-10 kg वज़न कम होगा क्षारीय चीज़ों के खाने से वज़न कम होता है,कफ खतम होता है एवं घुटनों का दर्द भी खतम होता है |

http://www.youtube.com/watch?v=_PnaEKmC_OM&feature=related

4-हमारे शरीर में वात-पित्त-कफ की अवस्था हमेशा एक सी नहीं रहती है --सुबह वात का प्रकोप ज्यादा रहता है ,दिन में पित्त का और शाम को कफ का रहता है |

5-दोपहर के खाने में ज्यादा से ज्यादा अजवाइन का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि अजवाइन पित्त नाशक होती है |दोपहर के खाने के बाद जो छांछ या मठ्ठा पियें उसमे अजवाइन का तडका ज़रूर लगाएं इससे खाना जल्दी पचेगा और पित्त भी नहीं बढ़ेगा |

6-पूरे जाड़े भर गुड ,तिल ,मूंगफली से बनी चीज़ें भरपूर खाएं |कभी भी कफ की शिकायत नहीं होगी |

Rajiv dixit ayurveda episode 5 part 3

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:35 AM Comments comments (0)

योग और आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे :-

1-गुड कफ को कैसे शांत करता है .?

* कफ के समय हमारे शरीर में फास्फोरस की कमी हो जाती है और गुड में सबसे अधिक फास्फोरस पाया जाता है |रोज़मर्रा में चीनी की जगह गुड का प्रयोग करें |चीनी बन्ने की प्रक्रिया में फास्फोरस खतम हो जाता है जबकि गुड और चीनी दोनों ही गन्ने के रस से ही बनते हैं |

*हमारे पेट का गुण अम्लीय होता है और चीनी में भीअम्ल होता है जिससे हमारे शरीर में,खून में अम्ल की मात्रा बढ़ जाती है और अनेक प्रकार के वात रोगों का जन्म होता है |

http://www.youtube.com/watch?v=dO3C0kCtRkM&feature=related

*गुड टूटने के बाद क्षारीय रहता है और उसमे alkaline property होती है इसलिए सुपाच्य होता है और बाकी चीज़ों के पाचन में भी सहायक होता है |

2-गुड एक ऐसा पदार्थ है जिसको एक नवजात शिशु से लेकर वृद्ध व्यक्ति भी खा सकता है |

3-गुड से भी अच्छा है राब या काक्वी (गुड बनने से पहले की तरल अवस्था )|

4-गुड गाढे रंग का अच्छा होता है न की सफ़ेद रंग का |सफ़ेद रंग के गुड की सफाई UREA इत्यादि से की जाती है |प्रकृति में जितनी चीज़ों का रंग गाढ़ा हो वो उतनी ही गुणकारी एवं श्रेष्ठ हैं |

Rajiv dixit ayurveda episode 5 part 2

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:35 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे :-

1-जिंदगी भर अगर वात की बीमारियों से बचना है तो शुध्ह तेल खाएं |शुध्ह तेल की पहचान है ,जितना अधिक चिपचिपा एवं गंध युक्त हो |

2-हमारे देश में पहले के ज़माने में खान पान का आधार बहुत वैज्ञानिक था |हर मौसम में खानपान शरीर की प्रकृति के अनुसार होता था ,क्योंकि हमारे शरीर में वात-पित्त -कफ की स्थिति हर मौसम में अलग-अलग होती है |

3-सर्दी के मौसम में :-तिल ,गुड,मूंगफली जैसे गुरुत्व (भारी पदार्थ )अधिक खाना चाहिए |क्योंकि सर्दी में शरीर में पित्त कम होता है और जठराग्नि अधिक तीव्र नहीं होती है |इसीलिए ऐसा भोजन करना चाहिए जो धीरे धीरे पचे और गरिष्ठ हो |

http://www.youtube.com/watch?v=yGS6y0pTamE&feature=related

4-गर्मी के मौसम में :-पित्त अधिक होता है इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन करना चाहिए |

5-बारिश के मौसम में :-शरीर समभाव में रहता है इसलिए न ज्यादा हल्का और न ज्यादा भरी भोजन करें |इस मौसम में ज्यादा पानी वाला भोजन नहीं करना चाहिए क्योंकि शरीर में पहले से ही नमी अधिक होती है |

6-पित्त की चिकित्सा का सबसे अच्छा उपाय है :-देशी गाय का घी

कफ की चिकित्सा का सबसे अच्छा उपाय है गुड और शहद

Rajiv dixit ayurveda episode 5 part 1

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:30 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे :-

1-शरीर में वात को समभाव में रखने के लिए प्रमुख तत्त्व है तेल (oil) ,और तेल का मतलब है शुद्ध कच्ची घानी का तेल |

2-why we should not use refined oil :-

refined oil को refine करने में 8-10 organic chemical का प्रयोग होता है और इन chemicals का combination चीज़ों को ज़हरीला बनाता है |

http://www.youtube.com/watch?v=pRxgZ1TiLf8

3-refined oil में चिकनापन और smell दोनों ही गायब रहती हैं जो की शरीर के लिए आवश्यक हैं |शुद्ध तेल में जो SMELL होती है वो PROTIEN के कारण होती है |

4-हमारे शरीर में HDL(high density lepoprotien) का level तेल से ही balance रहता है |आधुनिक विज्ञानं भी यही कहता है की HDL ही वात को CONTROL कर सकता है |

इसलिए कोशिश करके शुद्ध कच्ची घानी का तेल प्रयोग करें |

Rajiv dixit ayurveda episode 4 part 5

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:30 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में गतांक से आगे :-

1-खाना खाते समय चित्त एवं मन दोनों शांत होना चाहिए |खाने से पहले भोजन मंत्र पढ़ें या भगवान का स्मरण करके खाना शुरू करें|

2- सोने के समय दिशा का अवश्य ध्यान रखें ,ये वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी सही है :-हमारी पृथ्वी का north pole एवं south pole gravitational force के लिए एक चुम्बक की तरह कार्य करती है

http://www.youtube.com/watch?v=vRRyHuKQ8rQ

3-सर पूर्व या दक्षिण दिशा में रखें एवं पैर पचिम या उत्तर दिशा में रखें |

*पृथ्वी और शरीर के बीच में गुरुत्वाकर्षण बल (gravitational force)कार्य करता है |सिर शरीर का उत्तर है एवं पैर दक्षिण |उत्तर दिशा में सिर करके सोने से प्रतिकर्षण बल (law of repultion )कार्य करता है ,इससे शरीर संकुचित (contraction)होता है |इस वजह से BP हमेशा OUT OF CONTROL रहता है ,HEART BEAT अनियंत्रित रहती है और SOUND SLEEP नहीं आती है |

4-सिर दक्षिण में रखके सोने से FORCE OF ATTRACTION काम करेगा |इससे शरीर का विस्तार होगा ,BODY RELAXED रहेगी पूरी रात |इससे नींद अच्छी आती है |BRAIN हमेशा FORCE OF ATTRACTION में रहना चाहिए

5-इससे बच्चों की HEIGHT भी बढती है |

Rajiv dixit ayurveda episode 4 part 3

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:20 AM Comments comments (0)

योग एवं आयुर्वेद की श्रृंखला में आज वाग्भट्ट सूत्रों की चर्चा गतांक से आगे करेंगे :-

1-सूर्यास्त से पहले भोजन करने का वैज्ञानिक कारण है ,इस समय तक जठराग्नि प्रदीप्त रहती है इसके बाद बुझ जाती है |

2-नियत समय पर भोजन करने से sugar ,triglysride ,asthma नियंत्रित रहता है |

VLDL ,LDL--घटेगा

HDL--बढ़ेगा

3-दो विरुद्ध वस्तुएँ जिनके गुण धर्म विपरीत हों एक साथ नहीं खाना चाहिए |जैसे :-

*दूध के साथ प्याज न खाएं --त्वचा रोग होते हैं

दूध के साथ कटहल ,CYTRIC ACID (संतरा ,अंगूर ,नीम्बू ) न खाएं

अपवाद :-दूध के साथ एक खट्टी चीज़ ले सकते हैं वो है आंवला |

http://youtu.be/5TnLtntnxnE

*शहद +घी कभी ना खाए --विषाक्त होता है |

*उडद की दाल +दही न खाएं --BP की समस्या और HEART PROBLEMS बढती हैं |

4-भोजन हमेशा ज़मीन में बैठ कर खाएं |इस आस्था में बैठकर खाने से मणिपुर चक्र जाग्रत होता है और जठराग्नि प्रदीप्त होती है |भोजन का पाचन सुचारू रूप से होता है |

Rajiv dixit ayurveda episode 4 part 2

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:20 AM Comments comments (0)

मित्रों आज हम वाग्भट जी के सूत्रों की आगे के चर्चा करेंगे --

1-खाने का समय हमेशा निर्धारित रखें इससे पाचन हमेशा एक सा होता है |

2-हमारे पेट में "जठराग्नि " होती है जो भोजन को पचाती है वो सबसे ज्यादा सूर्योदय के 2.30 घंटे तक प्रदीप्त रहती है इसलिए हो सके तो भोजन सुबह करें ,अन्यथा नाश्ता ही भोजन के सामान करें |

http://youtu.be/y3M67EEkZ0k

4-सुबह के किये हुए भोजन का एक एक कण शरीर के काम आता है क्योंकि उस समय पाचन सर्वश्रेष्ठ होता है |

5-नाश्ता सबसे भारी दोपहर का भोजन नाश्ते से हल्का रात का भोजन दिन के खाने से भी हल्का होना चाहिए |

6-भोजन सिर्फ पेट भरने के लिए ही नहीं खाना चाहिए बल्कि ,भोजन करने से मन भी तृप्त होना चाहिए ,क्योंकि मन तृप्त होता है तो penial gland इससे सक्रीय रहती है अनेक प्रकार के मानसिक रोगों से बच सकते हैं |

http://youtu.be/1tkLfL9VYv8

Rajiv dixit ayurveda episode 3 part 3

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:15 AM Comments comments (0)

आज आयुर्वेद की श्रंखला में हम वाग्भट्ट जी के अत्यंत महत्वपूर्ण सूत्र को हम पढेंगे --

पानी पीने की सही विधि --

1--"पानी हमेशा घूँट घूँट करके पीना चाहिए क्योंकि इससे लार का निर्माण होता है |

2--हमारे पेट में भोजन को पकाने के लिए अम्ल होते हैं और मुह में जो लार होती है वो क्षार होता है

अम्ल+क्षार =न्यूट्रल (सामान्य) पानी हो जाता है |

3--इसलिए जितना घूँट घूँट करके पानी पियेंगे क्षार बनेगा और पेट में जाकर भोजन का पाचन होगा और पेट हमारा पानी की तरह रहेगा मतलब ढीला (स्वस्थ)रहेगा |

4--लार में medicinal property होती हैं ,जो की इंटरनल healing के भी काम आती हैं |

5--पानी हमेशा शरीर के  तापमान के अनुसार पीना चाहिए यानी की न ज्यादा न ही chilled |क्योंकि ज्यादा ठंडा पानी पीने से पेट को अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है और अंगों को कार्यशीलता (दिमाग ,ह्रदय etc.)धीरे- धीरे कम होने लगती है |

6--दिमाग का रक्त Gravity ke kaaran sabse pahle kam hone lagta hai aur aage chalkar Brain hamerege इत्यादि रोगों के होने का डर रहता है |

http://youtu.be/lmpxIuXDDNU

Rajiv dixit ayurveda episode 3 part 5

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 9:05 AM Comments comments (0)

आयुर्वेद की श्रृंखला में हम आज वाग्भट्ट जी के आगे के सूत्रों की चर्चा करेंगे :-

1-ताम्बे के बर्तन में रखे पानी को गुनगुना करके पीने की आवश्यकता नही होती है |

2-जो लोग हमेशा ताम्बे के बर्तन का पानी पीते हैं उन्हें ३ महीने बाद 15-20 दिन के लिए वो पानी पीना छोड़ देना चाहिए ,अन्यथा ताम्बे की अधिकता से होने वाली बीमारियाँ हो सकती हैं |पुनः इसके बाद शुरू कर सकते हैं |

3-दाल एवं दही को एक साथ न खाएं कभी ,अगर खाना ही है तो दही में जीरा ,अजवाइन और काला /सेंधा नमक का तड़का लगाकर लें |

http://youtu.be/pfM3ZGLsc0o

4-जाड़े के 3 महीने -नवंबर ,दिसम्बर ,जनवरी वात रोगों के लिए बहुत घातक होते हैं |इनसे बचने के लिए नीचे दिए हुए उपाय को करें -

1 गिलास दूध +1/2tbs अर्जुन की छाल +गुड या मिश्री का काढ़ा बनाकर पियें (लगातार 3महीने )

इससे कभी भी heart attack ,heart related कोई भी समस्या नहीं होगी |

Rajiv dixit ayurveda episode 3 part 4

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 1:35 AM Comments comments (0)

1-ज्यादा ठंडा पानी पीने के कारण large intestine सिकुड जाती है जिससे constipation जैसी समस्याओं का जन्म होता है |

2- दो विरुद्ध चीजें एक साथ कभी न खाएं ,जैसे ठंडा और गरम ,इससे पेट को अतिरिक्त कार्य करना पड़ता है |

3-उषापान (सुबह -सुबह पीना कुल्ला किये बिना मुह धोए जो पानी पीते हैं उसे कहते हैं ) ज़रूर करें इससे रात भर की बनी हुई लार हमारे अंदर जाती है पानी के साथ |

4-सुबह की लार (थूंक;) का आँखों के रोगों में बहुत ज्यादा महत्व है :-

*बच्चों की आँखों का चश्मा कुछ ही दिनों में उतर सकता है इसको सुबह-सुबह लगाने से |

*conjuctvitis जैसे आँखों के रोग 24 घंटे में ही ठीक हो सकते हैं |

*लार में activing ingredients वही हैं जो मिटटी में होते हैं |

http://youtu.be/HL1UNY1xLm8

Rajiv dixit ayurveda episode 2 part 4

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 1:30 AM Comments comments (0)

आज की श्रृंखला में हम वाग्भट जी के सूत्रों को भाई राजीव दीक्षित के शब्दों में सुनेंगे |


१- चक्की का आटा खाने से पेट के रोगों में कमी होती है ,यदि संभव हो तो चक्की घर में रखें इससे शरीर का भार भी कम होगा ,महिलाओं को 45 yrs के बाद होने वाली प्रोब्लेम्स में भी कमी आएगी |

http://youtu.be/RqGlUPlcHJQ

http://youtu.be/n3gz6R1KMyo

Rajiv Dixit Ayurveda Episode 1 part of 4

Posted by Dr.Sunil Kumar on January 16, 2012 at 1:25 AM Comments comments (0)

आप सब अपनी जीवन शैली में योग एवं आयुर्वेद को स्थान दे |भाई राजीव दीक्षित जी के व्याख्यान प्रतिदिन देने का प्रयास रहेगा ----

आज का विषय ---अलुमुनियम के बर्तनों का हमारे स्वास्थ पर कुप्रभाव

http://youtu.be/5I3LiPtCXYU


Rss_feed

Recent Videos

1443 views - 0 comments
1449 views - 0 comments
1528 views - 0 comments
1746 views - 0 comments